लखनऊ कोचिंग सेंटर में भीषण आग: 15 लोगों की मौत, जान बचाने के लिए पहली मंजिल से कूदे छात्र

Written by: Aman Sharma

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लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को हुए एक दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया। एक व्यावसायिक भवन में संचालित कोचिंग सेंटर में अचानक लगी भीषण आग में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। हादसे के दौरान भवन में फंसे छात्रों और कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए कई छात्रों को पहली मंजिल से कूदना पड़ा। घटना के बाद राहत एवं बचाव अभियान कई घंटों तक जारी रहा।

राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जबकि चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है।

अलीगंज के व्यावसायिक भवन में लगी आग

जानकारी के अनुसार यह हादसा लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में हुआ। भवन में कोचिंग सेंटर के अलावा गेमिंग जोन, पालतू पशुओं से जुड़ी दुकानें, क्लिनिक और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी संचालित हो रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग तेजी से फैली और देखते ही देखते पूरे हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। धुएं के कारण अंदर मौजूद लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया। कई लोग भवन के अंदर फंस गए, जबकि कुछ छात्रों ने खिड़कियों और बालकनी के रास्ते बाहर निकलने का प्रयास किया।

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और लंबे समय तक चले अभियान के बाद आग पर काबू पाया गया।

छात्रों में मची अफरा-तफरी, कई ने लगाई छलांग

हादसे के दौरान सबसे भयावह दृश्य तब देखने को मिला जब कई छात्र जान बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे कूदने लगे। स्थानीय लोगों के अनुसार 5 से 7 छात्रों ने ऊंचाई से छलांग लगाई।

सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो में भी छात्रों और अन्य लोगों को खिड़कियों से बाहर निकलने की कोशिश करते देखा जा सकता है। एक वीडियो में एक युवक टूटे हुए शीशे के रास्ते बाहर निकलने का प्रयास करता दिखाई देता है, लेकिन संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर जाता है।

हालांकि स्थानीय लोगों और बचावकर्मियों ने तुरंत घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का प्रयास किया। कई घायल छात्रों को तत्काल अस्पताल भेजा गया।

अस्पताल में भर्ती कराए गए घायल

राहत अभियान के दौरान कुल 24 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें से 15 लोगों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। कई घायलों का इलाज लखनऊ के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।

चिकित्सकों के अनुसार कुछ लोगों को गंभीर जलन और धुएं के कारण सांस लेने में कठिनाई हुई है। प्रशासन ने घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि सर्च ऑपरेशन पूरा कर लिया गया है और अब भवन के अंदर किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की आशंका नहीं है।

SIT जांच के आदेश, चार अधिकारी निलंबित

हादसे के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के दो अधिकारी, बिजली विभाग का एक अधिकारी और अग्निशमन विभाग का एक अधिकारी शामिल बताया जा रहा है।

इसके अलावा पूरे मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है। जांच टीम यह पता लगाएगी कि आग लगने के पीछे वास्तविक कारण क्या था और सुरक्षा मानकों में कहीं लापरवाही तो नहीं बरती गई थी।

पुलिस ने भी छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया जायजा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ घटना की सूचना मिलते ही सक्रिय हो गए। उस समय वह अलीगढ़ दौरे पर थे, लेकिन हादसे की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर लखनऊ लौटने का फैसला किया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। बाद में उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण भी किया और विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया घटनास्थल का निरीक्षण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे के बाद अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर लखनऊ पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

राहुल गांधी ने भी जताया शोक

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हादसे को बेहद दुखद बताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

प्रधानमंत्री मोदी ने की मुआवजे की घोषणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी संदेश में मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये तथा घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस हादसे को बेहद दुखद बताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

राजनीतिक दलों ने जताया शोक

घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया। रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने इस हादसे को अत्यंत दुखद बताया।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

राजनीतिक दलों ने हादसे की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर व्यावसायिक भवनों और कोचिंग संस्थानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि भवन में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण मौजूद थे या नहीं।

साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि आपातकालीन निकास मार्ग, फायर अलार्म सिस्टम और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी बड़े हादसों को जन्म दे सकती है। इसलिए जांच रिपोर्ट आने के बाद कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

निष्कर्ष

लखनऊ के अलीगंज में हुआ यह अग्निकांड उत्तर प्रदेश के हालिया वर्षों के सबसे दर्दनाक हादसों में से एक माना जा रहा है। कई परिवारों ने अपने बच्चों और प्रियजनों को खो दिया, जबकि कई लोग अब भी अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। SIT की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग कैसे लगी और इस दुखद हादसे के लिए आखिर जिम्मेदार कौन था। तब तक पूरे प्रदेश की नजरें जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी रहेंगी।

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Aman Sharma

Aman Sharma Gorakhpur Times के Founder & Editor हैं। वे स्थानीय समाचार, देश-विदेश, टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, स्पोर्ट्स और ई-स्पोर्ट्स से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करते हैं। उनकी प्राथमिकता तथ्य-आधारित, सत्यापित और पाठक-केंद्रित पत्रकारिता है। वे डिजिटल मीडिया के माध्यम से विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्यरत हैं।

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